मेरे बेटे की करवाचौथ

श्वेता व्यास

मेरे बेटे की करवाचौथ
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सारांश

त्याग और प्रेम की परिभाषा को अलग अलग मापदंड पर रख कर देखी गयी एक कहानी जो समाज के उस हिस्से का आंकलन करती है कि आज भी पुरुषों के आगे स्त्रियों का समर्पण कम आंका जाता है
Mamta Upadhyay
ऐसा ही होता है औरत ही औरत के दुख को नही समझती। बहुत बढ़िया स्टोरी
Utkarsh Mishra
बेहद खूबसूरत
आरती अयाचित
बहुत अच्छा लगा
वन्दना नामदेव वर्मा
very nice pati ka pyar hi h jo aurat ko sasural me sb kuchh jhel jane ki himmat deta hai....
Ravi Sinha
😊😊😊😊💐
Rachana Wadekar
Kya baat hai mam. achcha likhate ho.
हनीश मदान
बहुत ही अच्छा लिखा है जी
दीपा
kitna sahi kaha h aapne...
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