मेरे देश की धरती सोना उगले लेखन प्रतियोगिता।

Sushma Jain

मेरे देश की धरती सोना उगले लेखन प्रतियोगिता।
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पाठक संख्या − 47
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सारांश

हाय कृषक की करूण कहानी, मुख से कही न जाए जग की भूख मिटाने वाला, खुद भूखा सो जाये मेरे देश की धरती सोना उगले, फिर भी झूम के गाये पेट में मिट्टी बाँध वो अपने, पेट की आग बुझाये कभी आपदा बाढ़ की भोगे, ...
Moziram Gurjar 'दिलशान'
बहुत सुन्दर मार्मिक चित्रण
Pallavi Verma
अति सुंदर
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manoj solanki
बहुत ही सुन्दर लिखा है जी
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Pandey Sarita
संवेदनशील मुद्दे।
Krishna Tiwari
यही तो देश की विडंबना है सुषमा जी की देश का पेट भरने वाला किसान खुद भूखे पेट सोता है,उसकी व्यथा को बहुत ही सुंदर शब्दों में उकेरा आपने ।
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उपेन्द्र सैनी (अल्पज्ञ )
क्या कहूं आपने किसान के जीबन को कितने यथार्थ उरेक दिया आंखों के सामने चल रहा था। बहुत शानदार लिखा
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Aanchal Tyagi
बहुत ही मार्मिक लेखनी.... शुभकामाएं आपको🙏
sushma gupta
किसानों की लाचारी को जीवंत करती मार्मिक मर्मस्पर्शी रचना 💐💐💐💐💐
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Niharika Goswami
bahut sunder rachna 👌👌👌
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