मेरी वसीयत

मोनिका त्रिपाठी

मेरी वसीयत
(15)
पाठक संख्या − 94
पढ़िए

सारांश

उम्र सारी लगा दी इस देह को बनाने में.. कितनी मशक्कतें की है इसको सजाने में, आखिरी पड़ाव उम्र का आने को है अब कि, वसीयत मैं भी अपनी ये अभी से कर दूं कि.. इस खजाने को जो मैंने संभाला है उम्र  दराज़.. आ ...
सरोज वर्मा
बहुत ही खूबसूरत
रिप्लाय
अंजान सागर
सुंदर विचार
रिप्लाय
Amit Saini
बहुत ही खूबसूरत
Prakash Tiwari
प्रेरणा दायी उतम पंक्तियाँ ।
रिप्लाय
सुहेल उस्मानी
दिल से लिखी हुई रचना keep it up 💐
रिप्लाय
Vrushabh Mahankar
very nice
रिप्लाय
Awadhesh kumar Shailaj
वेहतरीन भावाभिव्यक्ति सम्पन्न रचना
रिप्लाय
Raghuveer singh Solanki
बहुत ही उम्दा लिखावट है
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.