मेरी मोहब्बत

Ankur Srivastava

मेरी मोहब्बत
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सारांश

देख कर अक्सर मुझे वो धीरे से मुस्का जाती है, गले लग कर मुझसे, मुझमे ही वो मिल जाती है। कुछ कहती नही है लबो से आंखों आंखों में ही बतियाती है, रख कर सीने पर सिर मेरे , मेरे साथ ही खो जाती है। कभी उंगली ...
विकास भान्ती 'कुलश्रेष्ठ'
this one is too too too good. love for lill lady & best wishes for my friend...
विनीत शर्मा
वाहः अंकुर जी गजब
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Nagesh singh rathor
आप द्वारा लिखी गई पंक्तिया बहुत ही अच्छी है इससे पता चलता है के कितना समय बदल गया है पहले जिसका ििनतजार होता था अब वो खत्म हो गया है पहले जो मजा था अब वो कहा है । पहले ििनतजार होता था डाकिये का अब वो फेसबुक और व्हाट्स आप पर सिमट कर राह गया है इसलिए आज कोई चिट्ठियां नही लिख पाता है पहले ओर आज में बहुत अंतर हो गया है।
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