मेरी बहु - फुटबॉल चैम्पियन

नेहा रस्तोगी

मेरी बहु - फुटबॉल चैम्पियन
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सारांश

बूढ़ी माँ बेटे से -- बेटा, अब, बूढ़ी हो गयी हूँ , तुझसे अब एक बात कहूँ , नहीं होता, घर का काम ये मुझसे, लादे मुझको, एक बहू , सब्जी खरीदने से लेकर, खाने बनाने तक का, सारा काम, मेरी भी, अब उमर हो चली , ...
मनमोहन भाटिया
कविता अच्छी है।
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Abhi
ha ha... awesome
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