मेरी पसंद की नोकरी

Kiran Singh

मेरी पसंद की नोकरी
(10)
पाठक संख्या − 106
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सारांश

जब हम अपनी पसंद का कुछ करना चाहते हैं तो।चाहै वह नोकरी ही क्यों ना हो थोड़े संघर्षों के बाद हम पा ही लेते हैं।
Sunita Dave
Maa KA saath bahut jarue
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MEHAK... 💕
अति उत्तम रचना
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Pramod Ranjan Kukreti
बहुत सटीक चित्रण ।
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अनुरोध श्रीवास्तव
स्त्री सशक्तीकरण की कहानी👌संयुक्त परिवारों का यही मनमानापन परिवार टूटनें की वजह है👌👌👌
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Shalini Singh
jindgi ka kadva satya....kahani apni si lagi
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R.K shrivastava
सुंदर सार्थक तथा प्रेरणादायक रचना ! परिस्थितियां चाहे जैसी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए ! कहानी यही सीख दे रही है ।
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Jiwan Sameer
सुंदर रचना
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ईश्वर सिंह बिष्ट
सशक्त सार्थक सृजन प्रेरक ।
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दुर्गा प्रसाद
बहुत ही भावनात्मक कहानी है। संयुक्त परिवारों में अच्छाइयां कम बुराइयां के भण्डार भरे होते थे। यदि ऐसे में पत्नी को पति का साथ ठीक से न मिले तो वो एक जिन्दा लाश बनकर रह जाती है। अच्छी कहानी है।👌👌👌👌👌
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