मेरा हिसाब कर दो

प्रीति राजपूत शर्मा

मेरा हिसाब कर दो
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सारांश

आज नियति की आँखे उसके मुह से ज्यादा बोल रही थी।सरे सवाल होठों की जगह आँखों में उतर आये थे।2 साल हो गए नितीश अब बस मेरा हिसाब कर दो। और नितीश जैसे अपने में ही सिमटा सा बैठा था,कैसे कर दूँ नियति का ...
Usha Garg
प्रीति जी सही किया नियति ने पढ़े लिखे लोग भी इस तरह का बर्ताव करते है दुख होता है
Usha Garg
प्रीति जी सही किया नियति ने पढ़े लिखे लोग भी इस तरह का बर्ताव करते है दुख होता है
Vijay Kumar
वाह बहुत ही लाजवाब लेखन जहां आपसी समझबूझ और विश्वास की कमी हो वही से रिश्तो का बिखराव शुरू हो जाता है...
Sushma Sharma
सच, औरत और मर्द के चरित्र को बखूबी चित्रित किया है। मन को सुकून देने वाला अंत, पूरी रफ़्तार से चली है आपकी कहानी, मन को बांधे रखा और अंत में हर पीड़ा से मुक्त हुआ। सुंदर कहानी
Asha Parmar
वाह प्रीति जी क्या सटीक कहानी है मान गए जी
Tara Gupta
सशक्त एवं परिपूर्ण हृदयस्पर्शी कहानी।
Varsha Jagdeep singh
बेहद मर्मस्पर्शी, अद्भुत 🙏🙏🙏
gurmukh singh
प्रेमी प्रेमिका या पति पत्नी के नाज़ुक रिश्ते की बुनियाद ही विश्वास है। इसे समक्ष रखकर एक बहुत सुंदर कहानी की रचना की गई है। बधाई!
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