मेंढकी

दीपक शर्मा

मेंढकी
(32)
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सारांश

निम्मो उस दिन मालकिन की रिहाइश से लौटी तो सिर पर एक पोटली लिए थी, “मजदूरी के बदले आज कपास माँग लायी हूँ...” इधर इस इलाके में कपास की खेती जमकर होती थी और मालिक के पास भी कपास का एक खेत था जिसकी फसल ...
लीना मल्होत्रा
मेंढकी पढ़कर दो ख्याल एक साथ आये कि अगर ये हुनर उस पुरुष के पास होता तो क्या उसका भी यही हश्र होता। स्त्री देह ही सिर्फ हिंसा नहीं झेलती बल्कि उसका मन, उसका हुनर भी झेलता है। पितृसत्ता इतनी गहरी पैठी हुई है कि यदि वह दरि बुनने में मग्न न होती तो कोई भी काम छोड़कर उसे कील दे देती। सिर्फ प्रतिभा ही पितृ सत्ता से लोहा ले सकती है।
Gaurav singh
बहुत अच्छी कहानी है
Nisha Pandey
nice स्टोरी
Hanuman Bairwa
यह जलन और कमतरी का एहसास ही तो है हर बिगाड़ के पीछे, हर तेजाब फैंकने की आपराधिक हरकत के पीछे.....
Shashi Khator
क्या एक औरत की यही वैल्यू है ।
Bhuvnesh Mudgal
दर्दनाक अंत
Barkha Verma
Mrd bs or kuch nhi,Inki mrdangi,inki ijjat,inki jid baki SB bekar,anpadh Mrd .
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