मृत्युभोज

Anjali Mishra

मृत्युभोज
(39)
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सारांश

आज आँगन में दीनदयाल चाचा की चीत्कार सुन सभी स्तब्ध रह गए।यह तो आशा के बिल्कुल विपरीत था। "चलो,दुःख आँसू बन कर निकल जाये, तो मन को धीरज मिले"।किसी प्रत्यक्षदर्शी ने कहा।मैंने पीछे मुड़कर टोह लेना चाहा ...
Vineet Jain
जीते जी लोग अपने मां बाप को किसी चीज के लिए नहीं पूछते और उनके जाने के बाद इतना दिखावा करते है, इससे अच्छा तो बिन औलाद रहना है। आपको बधाई अच्छी कहानी के लिए
Priti Sharma
सुन्दर व्यंग्य। हमारी रचनाओं पर भी दृष्टि डालिये और उत्साह बढाइये।
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Purnima Kashiva
marmik kahani.
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Archana Kumari
बहुत सुन्दर
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indu sharma
बहुत सुन्दर लगातार जोडे रखने वाली लेखनी
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Aparna Sinha
zindagi me Sukh Dena badi baat hai
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kawal jit Singh
बहुत सुंदर जीवन की सच्चाई से रूबरू करती कहानी कहानी
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विजय कुमार तिवारी
bilkul yahi hota hai na.yatharth chitran..
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Anjani Tiwari🇮🇳
वाह रे लोभी मानव
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रोहित मिश्रा
ati Sundar
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