मूव ऑन ... माई फुट

Sushma Gupta

मूव ऑन ... माई फुट
(68)
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सारांश

"तुम यकीन नही करोगी पर कुछ दिन से मैं तुम्हें बेईंतहा याद कर रहा था ।" "अच्छा! " "तुम अचानक कैसे आ गई ?" "किसी काम से दिल्ली आई थी और इसी तरफ किसी से मिलना था । वो काम हुआ नही । फिर सोचा इतनी दूर आई ...
Rehan Aabid Ali Kazmi
उफ्फ काफी सारी सच्चाइयों को समेटे हुए, बहुत अच्छी कहानी
संतोष सुधाकर
खूबसूरत रचना । अंतिम पैराग्राफ़ से यह लग रहा है कि विक्रम का दर्द प्यार खोने का कम, ठुकराए जाने का ज्यादा है 👌👍
akansha
very interesting h . real story lgti h
Nancy Singh
khoobsurat kahani .. dil ko chuti hui
अलका रानी
वास्तविकता के काफी नज़दीक है... बहुत सुन्दर
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