मुहाफ़िज़

Siraj Farooqui

मुहाफ़िज़
(23)
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सारांश

. ................सिराज फ़रूक़ी,पनवेल हनुमान निहायत ही शरीफ आदमी था. न किसी से कुछ लेना न देना अपने काम सेकाम.वह आॅटो रिक्शा चलाता, उससे जो भी आमदनी होती, उसमें से 50रूपये की दारू पीता और 50 रूपये ...
Asha Kubba
Kahani bahut achchi लगी.insaaniyat aaj bhi zinda hai. Lekhak ko badhai.
शहला अंस।री
क्या खूब लिखा है आपने।लाजवाब।
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vipin jain
Kash sabhi itne achhe ho
Sudhir Chourey
बहुत सुन्दर
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