मुस्कान को घिरने दो

ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा

मुस्कान को घिरने दो
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सारांश

मेट्रो में एक मुलाकात में प्रेम जन्म लेता है। उस प्रेम को आगे बढ़ने में हमेशा प्रेमिका की मुस्कान को विषाद के बादल घेर लेते हैं।क्यों? कहानी को पढ़कर खुद जान लीजिए...(इस कहानी के अंतिम अंश को 16-06-2019 को जोड़ा गया है और संशोधित किया गया है)
Sharda Rawat
nice
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Davinder Kumar
कहानी आपने अचानक खत्म क्यों कर दी अभी तो आप इस पर और लिख सकते थे
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मुकेश शेषमा, झुंझुनू (राज.)
कहानी अच्छी है... सटीक है....शव्दो की कमी है मेरे पास कहने के लिये .... बहुत ही उम्दा.....
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Ravi Kashyap Rajandar Kashysp
bahut badiya
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रेनू 'अंशुल'
कहानी अच्छी है ! सचमुच कई बार मैट्रो में अच्छी कहानियाँ जन्म ले लेती हैं ! परेशानियों का सामना हिम्मत से और मुस्कुरा कर करना चाहिये ! उसे सहने की हिम्मत दुगुनी चौगुनी हो जाती है
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प्रभात पटेल
बहुत बढ़िया
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Renu
आदरणीय सर -- बहुत ही मनमोहक कहानी है | मैं इसे प्रेम कथा नहीं - बल्कि सद्भावना से भरी अनुराग कथा कहना चाहूंगी | डॉ प्रवीन और शुभा जैसे लोगों के ये सद्भावना भरे रिश्ते रूहानी प्रेम की गरिमा बढ़ाते हैं | इस सादगी से भरी कहानी के लिए साभार शुभकामनायें |
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Pintu Biswas
कुछ कहने की आवश्यकता नहीं
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