मुर्दों की ट्रेन

वर्षा श्रीवास्तव

मुर्दों की ट्रेन
(210)
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सारांश

न वो पिछले स्टेशन से आती है न ही अगले स्टेशन पे जाती है..पर यहां रूकती जरूर है
avinash gupta
u r best hider of yr feelings....the only line of ur intro..force me to be here....wish to b part of yr deep.imagination.....best of luck...
Aditya Nayal
अछि कहानी है।
Pankaj Bisht
पूरे 6 भाग है इस कहानी के। और वर्षा जी खास आपसे कहना चाहता हूं कि अंधेरे कमरे में पढ़ते पढ़ते मुझे एक समय ऐसे लगा कि एक यात्री उस ट्रेन का मेरे कंधे पे हाथ रखने वाला है। बढ़िया लेखन, और वर्णन।
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सूरज जोशी
Waiting For Next Part
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ritik rajput
hello maidam aapko dar lagtaa thaa to mujhayy bulaa latayyyy
हर्षित शंखधार
इस भाग में बस सस्पेंस ही दिख रहा है... लेकिन अगले भाग से कुछ उम्मीदें अवश्य हैं.. बहुत अच्छा लिखा है आपने
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