मुफ्त की रोटी

Deepak SINGLA

मुफ्त की रोटी
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सारांश

औरत की ज़िंदगी का एक अदबुद सच
sandeep tanwar 😎
शानदार लेखन... रचना ने बहुत अच्छा संदेश दिया है
sanket chaturvedi
बहुत ही हल्की कहानी थी या ये कहें की सिर्फ़ आपने कहानी मे खुद को रो दिया ।
Tara Gupta
अब समय बदल गया है। पर तस्वीर में जो रंग आपने भरें हैं ,वे सच्चे हैं।
Aruna Garg
padi hui he.meri sas or Nanad to khud se pahle mujhe khilati he .per Kai gharo me shayad ESA ho.
Amit dubey
नहीं सर बिलकुल नहीं घर में एक गृहनी की जगह कोई नहीं ले सकता है और सायद ही कोई समझ सके
Amrita Tiwari
hridaysparshi...marmik saty...
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Vimal Kumar
ish kahani ko padh kar ab hum apni patni ko kabhi bhi ya nahin kahenge ki din bhar ghar mein tu kya karti hai
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babita Gupta
बेहतरीन रचना
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Reena Raj
very nice
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