मुफ्त का यश

मुंशी प्रेमचंद

मुफ्त का यश
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सारांश

उन दिनों संयोग से हाकिम-जिला एक रसिक सज्जन थे। इतिहास और पुराने सिक्कों की खोज में उन्होंने अच्छी ख्याति प्राप्त कर ली थी। ईश्वर जाने दफ्तर के सूखे कामों से उन्हें ऐतिहासिक छान-बीन के लिए कैसे समय ...
bablendra sharma
मुंशी जी की रचनाओं के लिए कुछ भी कहना सूरज को दिया दिखाने के बराबर है।महान वीभूती को शत शत नमन
Satish Kumar
मानवीय लालसा का सुन्दर चित्रण किया है मुंशी जी, मानव स्वभाव में मुफ्त की चीज पाने की बोहोत लालसा रहती है और अगर बात प्रसिद्धि की हो तो ये और भी हावी हो जाती है किसी भी कार्य सिद्धि का श्रेय प्राप्त करना प्रत्येक मानव की इच्छा होती है भले ही वो किसी और ने ही किया, प्रशंसा के बोल मनुष्य मन पर जादू जैसा असर करते है और वो ये सत्य जानते हुए भी की वो इसलिए प्रशंसा का पात्र नहीं है अपनी असलियत कभी सच्चे मन से जाहिर नहीं करता
अरविन्द सिन्हा
मानव मन का स्वाभाविक चित्रण , सभी के मन के किसी न किसी कोने में यश की इच्छा जरूर दबी रहती है ।
Madhusudan Dixit
उत्कृष्ट प्रयास सराहनीय है, महान विभूतियों की कालजई रचनाओं से परिचय कराने के लिए
Chaman Negi
देश के महान कथा सम्राट और उनकी महान कृतियों को मेरा कोटि कोटि नमन 🙏🙏
shalu sharma
अत्यन्त रोचक 😀😀😀👏👏👏
मधुलिका साहू
बढ़िया नुस्खा सुझाया गया है । अक्सर ऐसी परिस्थितियां सर पर आ खड़ी होती है जिनका उपाय नहीं मिलता । तो अब से ये बराबर ध्यान में रहेगा । और मुंशी जी के बारे में समीक्षा लिखना सूर्य को दीपक दिखाना है वो मेरे वश में कहाँ ? अनुपम
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