मुझे तुम जरूर मिलोगी

मनमोहन गुप्ता मोनी

मुझे तुम जरूर मिलोगी
(96)
पाठक संख्या − 3121
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सारांश

बिंदू,मंजू और राहुल कालेज के समय के तीन दोस्त। तीस साल बाद जिंदगी के इस मोड़ पर इकट्ठे होते हैं। रिटायरमेंट के पास पहुंच कर जिंदगी की दुश्वारियों के साथ खुलासा होता है उनके प्यार का , तो क्या स्थितियां होती हैं। कुछ भी कहने की स्थिति में न होते भी बहुत कुछ कह डालते हैथ कहानी के पात्र।
Teena Sarswat
gud one
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नम्रता श्रीवास्तव
'खतम कहानी' के आगे की कहानी।
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kapil
nice story sir
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ललित बदरेल
बहुत अच्छी रचना
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arun singh
bhaut acchi kahani dip ko Chu Lene wali.
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JS Naphray
Sahi ye aaj ke sachi he ak bap char beto ko pal sakta he per char bete apney Maa bap ko nahi rakh sakty
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vijay kumar
bahut nice story likhi aapne excellent
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Sourabh Soni
Suitable
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