मुझे चरणों में रहने दो

प्रतिभा राय

मुझे चरणों में रहने दो
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सारांश

तू मुझे अपने चरणों में रहने दो, ऐसा स्वर दे मै तुम्हारी ही गीत गाउं, ऐसी वीणा की तार को छेडंूझंकृत तार के लय को सुरों में बंाध पाऊँ मुझे अपने दिलों में रहने दो आँसुओं की धार को प्यार से बह रहे हैं बह ...
Sudhir Kumar Sharma
अद्भुत. मेरी रचना, " माँ सरस्वती को माल्यार्पण " को कृतार्थ करें
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प्रतिभा राय 'प्रीति'
ये एक सुन्दर पोएम है कवी प्रेयर कर रहा है और कह रहा है तुम मुघे आपने चरणों में ही रहने दो मई संगीत का ऐसा तान चेरुन की तुम मुग्ध हुए बिना न रह पाओगे छोटी पर सुन्दर १९--४--2017-
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