मुंशी प्रेमचंद - अनाथ लड़की

फैज़

मुंशी प्रेमचंद - अनाथ लड़की
(324)
पाठक संख्या − 14228
पढ़िए

सारांश

सेठ पुरुषोत्तमदास पूना की सरस्वती पाठशाला का मुआयना करने के बाद बाहर निकले तो एक लड़की ने दौड़कर उनका दामन पकड़ लिया। सेठ जी रुक गये और मुहब्बत से उसकी तरफ देखकर पूछा—क्या नाम है?
Ramesh kumar
kya likhu, bus ishwar se prarthana kr sakta hu ki kisi ko anaath na kre, aur sabhi ke dil ko seth ji jaisa banaaye, aur hme itna saksham banaaye ki mai logo ki sewa kr saku
Sarita Ahuja
सुंदर रचना प्रेमचंद जी की,धन्यवाद
Meena Bhatt.
मुंशीजी की कहानियों की मैं समीक्षा नहीं कर सकती.बस 5/5
Prameshwar Pramanik
प्रेमचन्द जी के लिखे पर टिपण्णी करना मतलब सूर्य को दीया दिखलाना है। 1914 में उनके द्वारा 'जमाना' में प्रकाशित यह कहानी उनकी उनकी चिर परिचित शैली की उत्कृष्ट कहानियों में से एक है जिसमें मानवता के सकारात्मक पहलुओं का सुखद चित्रण किया गया। इस कहानी को पढ़कर हृदय करुणा से अभिभूत हो उठता है। ऐसी उम्दा कहानी प्रतिलिपी पर उपलब्ध कराने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
Rajat Sharma
🌹🌹🌹🌹🌹
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.