मि. वॉलरस

मनीषा कुलश्रेष्ठ

मि. वॉलरस
(64)
पाठक संख्या − 5741
पढ़िए

सारांश

विंडचाईम हवा में डोला और मेरी नींद खुल गई. मैं एक उदास सपने के भीतर वैसे ही सोया था, जैसे तूफान भरी रात में भटक कर कोई एडवेंचरिस्ट अपने तम्बू में सोए, लगातार तूफान के बदतर हो जाने की आशंका में और उठे ...
अंजुलिका चावला
29 मिनट का समय लिखा दिखा तो सोचा फिर पढूंगी। हाथ के काम पूरे कर लूँ पर क्या हुआ मालूम नहीं maid खुद कब दरवाज़ा बन्द कर के चली गई बाहर के कमरे के सारे बिजली के बटन उसी ने बन्द किए मैं किसी कोमलांगी की कल्पना और उसके गदरू बच्चे की कल्पना में बंधी रह गई...
🇦🅿🅰🆁🅽🅰  🇷🅰🅹🅿🇺🆃
कहानी को पढ़ने वाला कहानी की दुनिया में खो जाएगा,ऐसी कहानी है यह।बहुत उम्दा
Yuvraj Rana
अप्रतिम
Manjula Goel
human nature complexes, a live pic
S Mahesh Dalke
बहुत अच्छी रचना बहुत से घुमाव लिए हुए किन्तु रचनाकार का अध्ययन रचना में परिलक्षित हो रहा है
pushpashahi
bahut achi kahani heart touching
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.