मिट्ठू

मुंशी प्रेमचंद

मिट्ठू
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सारांश

बंदरों के तमाशे तो तुमने बहुत देखे होंगे। मदारी के इशारों पर बंदर कैसी-कैसी नकलें करता है, उसकी शरारतें भी तुमने देखी होंगी। तुमने उसे घरों से कपड़े उठाकर भागते देखा होगा। पर आज हम तुम्हें एक ऐसा हाल ...
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प्रेम ऐसी औषधि है जो इंसान तो क्या जानवर पर भी असर कर जाती है।
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