मिट्टी के सपने

सुनील गोयल

मिट्टी के सपने
(45)
पाठक संख्या − 3752
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सारांश

कहते है इंसान इस मिट्टी से बना है, ये मिट्टी ही उसकी माँ है और ये मिट्टी ही उसकी ख्वाहिशों का संसार बसाता है और अंत में ये मिट्टी ही उसे अपने अन्दर समां लेती है. आज जो कहानी आपके सामने पेश करने जा रहा हूँ इस मिट्टी से जुडी है. मिट्टी के सपने कहानी है, ख्वाहिशों की, सपनों की, अपनों की, ज़ज्बातों की, सफलता की.
Meena Bhatt.
सरल ओर सुंदर रचना एक सामाजिक संदेश देती कहानी।
Sangita Sharma
bahut hi sunder aur bhavanaon se paripurn,bahut badhiya
JYOTI THAKUR
बहुत ही सुंदर और प्यारी रचना हैं।😄
Shashi Bansal
bahut hi sunder rachna
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Parikshit Sohani
सुंदर लेख
निम्मी सिंह
Ye sach hai... diwali par bhi hum chinese lights khareedte hain aur mitti ke diyo k liye in gareeb logo se ek ek rupaye k liye bargaining karte hain
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