माफ़ करना बाबूजी

अंजुलिका चावला

माफ़ करना बाबूजी
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सारांश

नए युग में पुराने मूल्यों को त्याग कर दूसरों पर बोझ न बनकर रिश्ते निभाने पड़ते हैं
Sushma k Pandey(देशु)
सही है
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ऋचा माथुर
बहुत ही अच्छी रचना। कई लड़कियां खुद ही अपने मायके कि नहीं होती। उनको सिर्फ मेहमान बनकर खातिरदारी का आनंद उठाना आता है।
Aruna Anand
लगता है कि मेरी कहानी लिख दी .मैं बिल्कुल ऐसी ही परिस्तिथि से गुज़र रही हूँ .इससे आगे का वर्णन मेरा पढ़ना .ज़रूर
sant lal pal
दिल को झकझोर देने वाली कहानियां हैं।
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