मानसी

धीरेन्द्र अस्थाना

मानसी
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सारांश

मानसी! मानसी! मानसी! बहुत शोर था मानसी का। चार एक हजार मकानोंवाली उस मध्यवर्गीय कॉलोनी का खंभा-खंभा जैसे मानसी के अस्तित्व से रोमांचित हो, स्तब्ध खड़ा था। जितने मुँह उतनी बातें। लेकिन कमाल यह कि सारी ...
Dreamway films
क्या रचना है 👌👌
Vikas Srivastav
एक ऐसी कहानी जिसका शायद कोई अंत नही।लगता है जैसे कहानी खत्म होते होते एक शुरुआत दे गई।बहुत ही अच्छी रचना।
Rajesh kumar Choudhary
ओजपूर्ण रचना... सराहनीय,👌👌
Poonam Kundra
बहुत बढिया।भाषा पर बहुत अच्छी पकड़ है।इतने विषम विषय को बहुत समझदार और सुलझा हुए मोड़ दिया ।वाकई काबिले तारीफ
मौमिता बागची
परिपक्व और सुंदर लेखन। बहुत संतुलित और नपे तुले शब्दों में कहानी की प्रस्तुति बेहद पसंद आई। बधाई आपको।
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