माधवी

इबोहल सिंह काङ्जम

माधवी
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सारांश

नम्बुल नदी की टेढ़ी-मेढ़ी जल-धारा दक्षिण दिशा की ओर बहते हुए काँची पर्वत की तलहटी में जहाँ क्षण-भर को विश्राम करती है, वहाँ से पश्चिमी दिशा में एक साफ-सुथरा छोटा-सा घर था। सन्ध्या के सयम एक विद्यार्थी ...
Santosh Yadav
bahut achcha likha hai
gokul negi
एक अदभुत रचना ।मणिपुरी संस्कृति से परिचय करवाने के लिए धन्यवाद ।।।
Jayaditya Thakur
इस कहानी को पढ़ कर ऐसा लगता है कि मैं ही इस कहानी का पात्र हूं
ghansyam satanakar
अद्भुत रचना । जिन्दाबाद।
ranjeet kumar
अद्भुत!!विस्मयकारी!!
Saroj 787
mujhe bahat achha laga, thank you so much
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