माधवी

इबोहल सिंह काङ्जम

माधवी
(89)
पाठक संख्या − 8528
पढ़िए

सारांश

नम्बुल नदी की टेढ़ी-मेढ़ी जल-धारा दक्षिण दिशा की ओर बहते हुए काँची पर्वत की तलहटी में जहाँ क्षण-भर को विश्राम करती है, वहाँ से पश्चिमी दिशा में एक साफ-सुथरा छोटा-सा घर था। सन्ध्या के सयम एक विद्यार्थी ...
Krishna Singh
रहस्य रोमांच से परिपूर्ण, उत्कृष्ट रचना 🌷
S Yadav
बहुत मार्मिक कहानी है
Uttam Chand Jain
गजब कहानी है मेरे दोस्त मणिपुर की वादियां मुझे अच्छी भी लगती है लेखक श्री से एक बात पूछना चाहता हूं की मणिपुर में भी क्या हिंदी चलती है
Davinder Kumar
अति उत्तम
Santosh Yadav
bahut achcha likha hai
gokul negi
एक अदभुत रचना ।मणिपुरी संस्कृति से परिचय करवाने के लिए धन्यवाद ।।।
Jayaditya Thakur
इस कहानी को पढ़ कर ऐसा लगता है कि मैं ही इस कहानी का पात्र हूं
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.