माधवी

इबोहल सिंह काङ्जम

माधवी
(72)
पाठक संख्या − 7934
पढ़िए

सारांश

नम्बुल नदी की टेढ़ी-मेढ़ी जल-धारा दक्षिण दिशा की ओर बहते हुए काँची पर्वत की तलहटी में जहाँ क्षण-भर को विश्राम करती है, वहाँ से पश्चिमी दिशा में एक साफ-सुथरा छोटा-सा घर था। सन्ध्या के सयम एक विद्यार्थी ...
ghansyam satanakar
अद्भुत रचना । जिन्दाबाद।
ranjeet kumar
अद्भुत!!विस्मयकारी!!
Saroj 787
mujhe bahat achha laga, thank you so much
रिप्लाय
sanjay Singh chauhan
बहुत ही मार्मिक रचना है
Ashok Sonawane
जबरदस्त
ऋतेश कुमार
सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक! समुचित अनुवाद!! धन्यवाद! साधुवाद!!
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.