मातमपुर्सी

सूरज प्रकाश

मातमपुर्सी
(37)
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सारांश

इस बार भी घर पहुंचने से पहले ही बाउजी ने मेरे लिए मिलने जुलने वालों की एक लम्बी फेहरिस्त बना रखी है। इस सूची में कुछ नामों के आगे उन्होंने ख़ास निशान लगा रखे हैं, जिसका मतलब है, मुझे उनसे तो ज़रूर ही ...
Vivek Malik
कमाल का लिखा है, आखों में आंसू भी उतर आयद, इसका अगला भाग भी लिखिए।
Madhu Sinha
कहानी पढ़ कर लगा किसी हकीकत से वाकिफ हो रही हूं। ऐसा ही होता है ,जब गम गहरे पैठ जाता है तो इंसान अंदर से टूट जाता है ,लेकिन बाहर से सामान्य बना रहता है। भावुक कर दिया रचना ने।कभी मौके पे मातमपुर्सी के शब्द नहीं जुटते, कभी .........मौका खो जाता है🙏🙏
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Sarthee Sahu
कहानी aachi थी, kya yahi end tha ya aur bhi
Neha Gupta
HArdum rote rahne seDukh kya kam ho jayega.
Siddharth Vashishth
क्या कमाल लिखते हो sir
Kanchan Saxena
अच्छी कहानी
Veena Jha
कहानी अधूरी है....
डा.कुसुम जोशी
अच्छी कहानी ,अतं में पाठक के दिमाग में कुछ प्रश्न रह गये
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