मां तुम भी कुछ कहो ना

AnujaRakesh sharma

मां तुम भी कुछ कहो ना
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पाठक संख्या − 148
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सारांश

यूं बेहिसाब मोहब्बत देते-देते तुम भी तो थक गई होगी मां, कुछ कहो ना मां
ईश्वर सिंह बिष्ट
जीवन की सच्चाई को रेखांकित करती हुई सार्थक रचना है प्रेरणा देती हुई । हार्दिक बधाई शुभकामनाएँ आपको ।
kanchan pandey
माँ का बहुत खूबसूरत चित्रण है..ये सिर्फ शब्द नहीं भावनाओं का अथाह सागर है..प्रशंसनीय
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Swati Bhandari
Very nice Anuja. Such a touching concept....
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amrita anand
Reality of a Indian mother
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Sanjay Markandey
मर्मस्पर्शी रचना।
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Rakesh Dwivedi
ये कहानी अच्छी लगी ..
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