माँ

पाण्डेय मृदुल

माँ
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सारांश

सैम ने बताना चालू किया ........... बहुत दिनों से मैं कुछ छुपाये था पर आज कुछ कहना चाहता हूँ , माँ मुझे याद है वो दिन जब पापा जल्दी सो कर उठ गए थे , और उन्होंने आपको धीरे से जगाया था और कहा था ," अजी ...
sunanda sharma
मां के मन की स्तिथि कैसी होती है ये बहुत ही अच्छी तरह समजाय गया है मै भी मा हूं बच्चे बाहर रहते हैं
suman vishwakarma
yes I Kahani na like padkar man bahut kharab ho jata hai khaskar ek na ka
Maurya Ambika
मार्मिक...
BANDANA ANAND
भावनाओं को छूती हुई सुंदर व सरल रचना ।इस कहानी के माध्यम से आज की घटित घटनाओं के दुखद पहलू का चित्रण कियागया है ।आज के दौर में अधिकांश परिवार इसके भुक्तभोगी हो रहे हैं ।
Archana Gautam
रुला दिया सच मेँ
M bharti
Aapki khani ne to rula hi diya
Manisha Chouhan
bohot achi story h sir...pani aa ankho me padhte padhte...
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