माँ का व्हाट्स एप

पूजा व्रत गुप्ता

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सारांश

उस दिन सुबह उठते ही माँ मुझपर जोर से चिल्लाई ... "उठ गयीं तुम ?? जाओ -जाओ और सो जाओ जाकर ।अभी तो बस 12 ही बजे ही हैं।लोगों का एक वक़्त का काम ख़त्म होकर दोपहर की नींद का समय भी हो गया लेकिन ये महारानी ...
deepak sikarwar
पूजा जी आपकी कहानी पढ़ कर मुझे वो ख़ुशी के पल याद आगये जब मैने अपनी माँ के लिए नया मोबाइल खरीद कर दिया था। और उसमें उनको वाटस अप और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया पर पोस्ट करना और देखना सिखाया था । ...........बहुत ही उम्दा रचना लिखी है आपने , इसे पढ़ कर तो सच में मजा आगया।
Nupur gautam
bahut badhiya kahani likhi aapne sabki mammi aise hi gussa krti h
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