महाभारत-१

mukesh nagar

महाभारत-१
(57)
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सारांश

महाभारत ******** एक महाकाव्य....एक कथा जिसमें सार है- हम सबके जीवन का... पर.. निश्चित रूप से ये सारी कहानियाँ हम सबने पहले कभी भी न सुनी होंगी। तो आइए, "नारायण नमस्कृत्वा" आरम्भ करते हैं... म हा भा र ...
Anita
param aanand dayak ,aapka aabhaar hume hmare mahakavya ki anmol jaankaari dene ke liye 🙏🙏
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Rajesh Maurya
very nice
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manojdivana
बहुत खूब
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Niharika Arora
पौराणिक ग्र॓थो के हिसाब से शिव भगवान राम की अर्चना करते है रामायणानुसार राम भगवान शिव की स्तुति करते है ,भगवान शिव के अवतार हनुमान भगवान राम की सेवा करते है ,ये दोनो भगवान मिल के पब्लिक को पागल तो नही बना रहे ,बताओ यार भगवान न हुए आम आदमी पार्टी के founder member हो गए
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Babu Lal
nice
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मुकेश शेषमा, झुंझुनू (राज.)
उम्दा...लिखने में पारंगत....
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shraddha
great kavya
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पं.रवि शास्त्री
वाह साब वाह! हृदय में नई कोपलें खिल उठी। सार्थक प्रयास, शब्दों के सही चुनाव का असर अंत तक बांधने में सफल सिद्ध होता है। और सबसे बड़ी बात मन में जिज्ञासा भी भर देता है तथा अगली कहानी के लिए बेसब्री व बेचैनी भी बड़ा देता है। अग्रिम किश्त के लिए तैयार, पंक्ति में सबसे आगे बैठा हूँ, शुभकामनाओं सहित इंतज़ार रहेगा।
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