मसान-भैरवी

सर्वेश सिंह

मसान-भैरवी
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सारांश

वह नीचे, मसान में, उतर रहा था | यह बनारस के हरिश्चंद्र घाट का जीवंत मसान था जहाँ किसी ज़माने में सत्य की संभवतः सबसे कठिन परीक्षा राजा हरिश्चंद्र ने दी थी- जीवन के चंचल सत्य की परीक्षा, मृत्यु के स्थिर
Govind Pandey
बहुत ही शानदार और जानदार ।
Vishal Suriya
Singh sahab adbhut kehne ke liye shabd nahin
Giriraj Tomar
उत्तम क्या यह कल्पना थी?
Nitin Sharma
कहानी कुछ समझ मै नही आई वैसे आप को शाबर मंत्रो अचछी जनकारी है
Sonalika Rai
बहुत ही सुंदर। यथार्थ
Lalit Kumar
जिंदगी को पढ़ना एक कला है और इस कला का भी अपना एक फ़लसफा है. बहुते स्कूल हुए इस फ़लसफ़े के, लेकिन बनारसी स्कूल की बात ही जुदा है... बनारस का एक अलग रंग-ढंग है। यहां सबै मलंग है और बनारस है भी बड़ी गूढ़ जगह... ऐसी जगह जहाँ शंकर भी चांडाल से शास्त्रार्थ में हार जाते है तो, बुद्धत्व प्राप्त करने के बावजूद, बुद्ध किनारे से ही निकल जाते हैं... कबीर का साक्ष्य यहीं उभर के आता है तो  शिव का कल्याणकारी स्वरूप भी यहीं दिखता है...यह कहानी इन्ही किनारों को छूती निकलती है, जिसे सर्वेश सिंह ने अपने अनुभवों को निचोड़ के निकाला है...
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