मशीन नही हूँ मैं

पिया सिंह

मशीन नही हूँ मैं
(38)
पाठक संख्या − 788
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सारांश

ऐसे बहुत पहलू होते है एक औरत की जीन्दगी के जिसे सिर्फ वही महसूस कर पाती है .. उसका एक दृश्य
Deepak Dixit
वाह
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Om Shankar
आप अपनी जगह बिल्कुल सही हैं, लेकिन ये दर्द एक फौजी बखूबी समझता है । शुभस्नेह !💐💐
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शैलेश सिंह
सरल शब्दों से लिखा गया भावनात्मक रचना,, सच को उजागर करता प्रश्नचिन्ह , कमाल की , लेखनी है बहन,,
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antima Pandey
रुला दिया आपकी रचना😭😭😭
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मल्हार
👌👌👌👏💐💐
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Satpal. Singh Jattan
nice one mam ji
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शरोवन
भारत वह देश है जहां रूढ़ियों की आड़ में जीवितों पर मुर्दे शासन करते हैं और स्त्री को देवी का लिवास पहनाकर महज जरूरत की वस्तु समझा जाता है। बेहतरीन रचना।
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Kuldeep Hooda
श्रेष्ठ रचना कहना भी कम ही लगेगा..
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विश्वनाथ
अतिउत्तम
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Amit Saini
very very nice
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