मर्माहत मानस

Satya Prakash

मर्माहत मानस
(9)
पाठक संख्या − 44
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सारांश

भावना के मधुबन को हमने        अक्सर जग में लुटते देखा, सपनों के चंदन वन को हमने          हर क्षण है जलते देखा। मेरे मर्माहत मानस पर          उन चेहरों की है अमिट छाप, धरम की आड़ में हमने जिनको ...
Dipti Biswas
खतरनाक सच्चाई।।।।
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Krishna Khandelwal singla
बहोत बढ़िया रचना
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Aditi Tandon
सौ प्रतिशत सही फरमाया आपने ऐसा ही होता है 🙏🙏🙏
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Tanuja
बहुत सुन्दर प्रस्तुति बधाई स्वीकारें
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Shikha Singh
वर्तमान कटु सत्य को बड़े ही सुंदर तरीके से कहा है।
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Nidhi Vyas
aawazon ke baazaaron mein......gud 1
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Shivani Pandey
वाह....👌
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Nittu kumar
विडम्बना यही है👌💐👌👌 बहुत खूबसूरती से कटु सत्य लिखा आपने👌👌 हर संवेदनशील और चिंतनशील इंसान की पीड़ा है यह🙏🙏🙏
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