मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस

विजय कुमार सपत्ती

मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस
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सारांश

||| सुबह 8:30 ||| मैंने टैक्सी ड्राईवर से पुछा- “और कितनी देर लगेंगी।” उसने कहा – “साहब बस 30 मिनट में पहुंचा देता हूँ।” मैंने घडी देखी 8:40 हो रहे थे। मैंने कहा – “यार 9 बजे की गाडी है।” थोडा जल्दी ...
Smriti Tyagi
why could he not kill Martha
Bhagyashree Mathur
nice..par agar Michal ne khud hi rana ko dhakka de diya to aise hi wo martha ko b de skta tha..kisi k sahare ki jarurat kyo padhi?🙄
Sunny Kansykar
nice story suspence to lajwab thi .. khair mujhe kya😁😁
Dev Tiwari
अपराधी का अंजाम ऐसे होते हैं तो अच्छा लगता है बहुत सुंदर रचना
Priya
awesome story ..........
Sharda
sen
nice story 👌 👌
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