मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस

विजय कुमार सपत्ती

मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस
(702)
पाठक संख्या − 56995
पढ़िए

सारांश

||| सुबह 8:30 ||| मैंने टैक्सी ड्राईवर से पुछा- “और कितनी देर लगेंगी।” उसने कहा – “साहब बस 30 मिनट में पहुंचा देता हूँ।” मैंने घडी देखी 8:40 हो रहे थे। मैंने कहा – “यार 9 बजे की गाडी है।” थोडा जल्दी ...
Ravi
waste of time very loose plot nothing interesting
Balaji mishra
बढ़िया कहानी प्र काल्पनिक
Rajan Kumar
nice but predictable
Rohit Rastogi
रोमांचक कहानी
Somesh Ârmo
👌👌👌👌👌
Smriti Tyagi
why could he not kill Martha
Bhagyashree Mathur
nice..par agar Michal ne khud hi rana ko dhakka de diya to aise hi wo martha ko b de skta tha..kisi k sahare ki jarurat kyo padhi?🙄
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.