ममत्व

सुनीता माहेश्वरी

ममत्व
(93)
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सारांश

सावन का महीना होने पर भी बारिश की एक बूँद न थी | सूरज आग उगल रहा था | चिलचिलाती धूप खिड़की से सीधे रानी के मुँह पर पड़ रही थी | रानी की बेचैनी और बढ़ती जा रही थी | वह डॉक्टर के यहाँ लम्बी कतार में बैठी ...
ShashiNigam
achhi kahani hae
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Vijay Kumar
बहुत ही मार्मिक लेखन बेटियों के प्रति ऎसा व्यवहार आज भी दु:खद और चिंतानीया..
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Lb Gupta
Bahut hee sundar सुन्दर
Rukmani Thapliyal
सुंदर रचना
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Muhammad Shariq
nice story
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SAMIDHA -The Realization
बहुत सुन्दर कहानी बुनी है आपने ।बधाईयाँ ।
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Shiv Shankar Kushwaha Shiv
बढ़िया है मन खुश ही हो गया।।।
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Sumit Ramawat
bahot badiya
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omshri singh
nice
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