Alok Shende
Bahut Sundar Laghukatha, yah kary agar Beti Bina apna sasural chore Karti to aur behtar hota, vahi par Apne ma bap aur vakil ko bulana Chahiye, sabke samne saf saf bat Karni Chahiye agar sasural vale na mane to vahi se police ko phone Karke bulana Chahiye, aur vakil ki gavahi se jurm darj Kar sabko jail bhej dena Chahiye.
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रमेश तिवारी
अतिसुंदर प्रस्तुति।। कृपया स्नेह स्वरूप मेरी रचना श्रीदुर्गाचरितमानस पढ़ने का कष्ट करे समीक्षा की प्रतीक्षा जय माता दी सहृदय धन्यवाद
हेमंत यादव
बहुत शानदार लिखा है ... दहेज के लोभी इंसानो का मूहँ बंद होना जरूरी है💐💐💐💐💐👌👌👌👌👍👍😁
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उमेश चन्द्र
नेहाजी बिल्कुल सहीकहा ....उस दोराहे पर स्वयं को भी त़ोएक बार खडा़ होकर सोचना चाहिए.... सुन्दर अभिव्यक्ति
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संतोष नायक
'वे सभी लोग इसके लिए दोषी है जो इस जुर्म को सहते है '।सही बात रचना'मन बावरा'अच्छी लगी,बस कहानी घटनाप्रधान न हीं लगी।
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brajmohan pandey
आदमियत अब नहीं रही।दहेज एवं पिता के प्रति पुत्री का प्रेम चित्रण मार्मिक है ।भीड़ मे भी आदमी अकेला रह गया है।आपकी सोच के लिए साधुवाद।आदमियत पर मेरी रचना आदमी पढने का कष्ट करें।
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शिशिर श्रीवास्तव
अच्छा लिखा है पर थोड़ी नये पन की कमी महसुस हुई
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आशीष कुमार त्रिवेदी
समाज की सोंच में बदलाव ज़रूरी है। ऐसे कड़े फैसले जैसा वर्षा ने लिया ही इस समस्या को खत्म करेगा
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सचिन बारोड़
कहानी नही सत्य है पर आखरी में आपने कहानी को थोड़ा और आगे लेजाकर अंत करना चाहिए था।
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पिंकी राजपूत
पता नहीं इस कुप्रथा से कब मुक्ति मिले, सार्थक विषय!
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Anuj Bhandari
अति उत्तम
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Manju Saraf
बहुत अच्छा लिखा आपने
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Alpa Mehta
बहुत ही संवेदशील विषय पर आपने अपने मौलिक लेखन की प्रस्तुति की है, ओर समाज मे जाग्रुति लाने का पूर्ण प्रयास किया है,,, बेहतरीन.. उमदा.. अदभुत.. ✍️✍️✍️..
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सरोज प्रजापति
दहेज लोभियों को करारा जवाब देती हुई बेहतरीन रचना 👌👌
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indu sharma
बहुत सुंदर लिखा है आपने नेहा जी वास्तव में आज दहेज के लोभी लोगों ने विवाह के पवित्र बंधन को एक विकृत रूप बना दिया है। व्यापार बना दिया है साधुवाद
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Shikh@ Gupt@
सुन्दर और सशक्त रचना ,,आज के दौर में वाकई ऐसी हिम्मत की जरुरत है।
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Naveen Pawar
कुछ शोर सा है ना जाने मन क्या सोचता है पूछना भी चाहा और जानना भी ना पूछ सकी ना जान सकी की ये बावरा मन क्या चाहता है मन मैं कुछ तुफान सा है हलचल सी है कुछ शोर सा है
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shwati pandey
सच लिखा है आपने .बहुत खूब👌 ..दहेज़ के लालच में आज न जाने कितने रिश्ते टूटते और तबाह होते है। दहेज़ प्रथा दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।..
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Alka Bhardwaj
बहुत खूब नेहा जी, आपने इस कहानी से एक अच्छा सिख दी है समाज को, दहेज लोभियों को दहेज देने से अच्छा उन्हें ऐसा सबक सिखा दें कि वो दहेज का नाम लेने से पहले कांपने लगें.... उत्तम लेखन और उत्तम विचार... ऐसे ही लगे रहें... बहुत बहुत शुभकामनाएं...!
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