मन बावरा

Neha Sharma

मन बावरा
(144)
पाठक संख्या − 760
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सारांश

"अरे भई अभी तक वहां फूलों की मालाएं क्यों नहीं लगाई और सामने वह सामान अभी भी वैसे ही बिखरा पड़ा हुआ है। उफ! कितने ढ़ीले हैं ये  लोग।" यह कहते हुए राघवसिंह के कदम तो आज रुक ही नहीं रहे थे। दो दिन से ...
khushboo shukla
बहुत खूब...
Sona Mishra
बोहत सुंदर रचना
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शशि कुशवाहा
very interesting story
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Jabeen Begum
true
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Sunita atul Singh
कमी समाज से ज्यादा उन लड़कों का है जो दहेज लेते हैं शायद यह सोच कर कि जीवन भर उसको खिलाने ,कपड़े और रहने का खर्च है जो शर्म नाक है । दहेज वह सबसे ज्यादा ले रहे हैं जो बुद्धिजीवी ,IAS,PCS,वर्ग के हैं और सरकारी नौकर तो जानवर से भी गये गुजरे हो गये है ,चौथे वर्ग का कर्मचारी भी दस लाख से नीचे की कार नहीं मांगता । दहेज मांगने वाले लडके को जो मां बाप की आड़ में मूक समर्थन करता है उसको कानून के अनुसार ,बरगलाने और धोखा देकर ,दहेज लेकर शील भंग किया जिसके उपरांत मानसिक और शारीरिक टुटने से मुआवजा करोड़ों में मांगा जाये। क्योंकि औरत की ईज्जत ही शादी के रुप में ईज्जत से किसी के घर भेजने की प्रथा है । लड़की के शरीर का उपयोग की भारी कीमत दहेज भोगी औरत को लेना चाहियै । आदमी जान धन दौलत है देश में दस ,बीस लोगों की सम्पति जायेगी ,इन लालची ,नाकारा लड़कों को सबक मिलेगा ।
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Chandrabali Singh
very heart touching story, Bahut aacha laga pedke.....
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पूजा गौतम
बहुत ही अच्छी और समाज को आईना दिखाने वाली कहानी l
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poet baba vk
पिता पुत्री के असीम भावनात्मक आत्मीय संबंधों को अभिव्यक्त करती हुई मन बावरा कहानी सामाजिक कुप्रथा के ताने-बाने में उलझी हुई लोभ लालच एवं महत्वाकांक्षाओं के जहरीले सागर में डोलती हुई नाव की तरह दांपत्य जीवन की विषमताओं को बहुत ही गहराई से अभिव्यक्त करती है. बेटी के हृदय की मार्मिक व्यथा और पिता के आर्थिक शोषण की व्यवस्था को चित्रित करते हुए कहानी अपने उपसंहार तक पहुंचती है रचनाकार ने सामाजिक कुप्रथा पर गहरा प्रहार करने का प्रयास तो किया किंतु समाधान के अभाव में कहानी अधूरी सी लगती है ऐसी जटिलताओं में समाधान बहुत ही मूल्यवान साबित होता है जो भी हो जैसा भी हो किंतु हर एक विषमता का एक समाधान होना चाहिए कहानी बहुत ही प्रेरणात्मक है. शब्दों में भाव अभियोजन एवं अलंकार का बहुत ही संयमित प्रयोग कहानी को बहुत ही सशक्त अभिव्यक्ति बना देता है. कहानीकार नेहा शर्मा जी आपको बहुत-बहुत बधाई... -- विचारक्रांति
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Pawan Sharma
Bahut achaa likha hai
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