मन का सुहागरात

देवेन्द्र प्रसाद

मन का सुहागरात
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सारांश

“तुम्हारे आत्महत्या वाले शब्द कानों में गूंज रहे थे। तुम्हें झिड़कने की ग्लानि भी थी मन में।  दीनू काका ने फोन करके तुम्हारी हालत बताई, तो मुझसे रहा नहीं गया। कार वापस मुड़वा ली। सोचा मीटिंग तो सारी ...
Deepak Kumar
beyhadh khoobsurat ......Sukriya iss khoobsurat kahani ke liye....
Vandana Verma
story pad k bahut hi sukhad anubhav hua...very nice story
गजेन्द्र भट्ट
अपनी ही भावनाओं के ज्वार में बह रहे नायिका और नायक कहानी के चरम बिन्दु तक पाठक को बांधे रखते हैं। कहानी के सुन्दरतम समापन के लिए लेखक को साधुवाद!👏👏
Anupam Shukla
बहुत बढ़िया कहानी
Umesh Kumar
Bhut hi sunder Laga jaise mere jivan ki kahani ho, Dil Ko Chu gayi, thanks to share
varsha bal
toooo gud Story actually two tyms read this story osm Love story
Pratik Awasthi ( Advocate)
अच्छी कहानी के लिए कहानीकार को बधाई।....जय श्री कृष्ण....
Aashish Kumar
बहुत सुंदर कहानी है । हृदय को स्पर्श करती बहुत कहानियां पढ़ी पर ये कहानी उन सब कहानियों से परे है
Yashpal Singh
अदभूत ॥॥॥। कभी कभी हम खुद को नेक दिखने की चाह में दूसरें की मन की व्यथा समझने में गलती कर जातें हैं
Dipika Singh
beautiful story👌👌
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