मन का सुहागरात

देवेन्द्र प्रसाद

मन का सुहागरात
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सारांश

“तुम्हारे आत्महत्या वाले शब्द कानों में गूंज रहे थे। तुम्हें झिड़कने की ग्लानि भी थी मन में।  दीनू काका ने फोन करके तुम्हारी हालत बताई, तो मुझसे रहा नहीं गया। कार वापस मुड़वा ली। सोचा मीटिंग तो सारी ...
Aman Saluja
behtareen story🙂
Aniket Tushir
A very nice story !!!
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Reena singh
आपकी बहुत ही सुंदर कृति👌👌👌👌👌
Pooja Rani
Words nhi hai story ki tarif करने के लिए.. Bas itna khaugi के rula diya.. Dil को छू gyi..
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jyoti sood
excellent 👍👍 👍👌👍 👌👍 👌👍 👌 v nice
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