मत जाओ नीलकंठ

अर्चना सिन्हा

मत जाओ नीलकंठ
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सारांश

वंदना जी एक अधेड़ उम्र की महिला हैं जो अपने सेवानिवृत्त पति के साथ एक सामान्य जीवन जी रही होती हैं। उनके पड़ोस में नीलकंठ नाम का एक सुदर्शन युवक रहने आता है जो वंदना जी के बेटे की उम्र का है। आरंभ में वे उसे इसी रूप में स्वीकार करती हैं लेकिन धीरे-धीरे नीलकंठ की उपस्थिति उनके युवावस्था के सुप्त इच्छाओं जगा देती है और न चाहते हुए भी उनका मन नीलकंठ के आकर्षण के प्रति समर्पण कर देता है। ऐसे में अचानक एक दिन उन्हें नीलकंठ के वापस जाने की सूचना मिलती है और अपनी हताशा से भयानक रूप से जूझती वंदना जी एक बार फिर जिंदगी के बियाबान में अकेली खड़ी रह जाती हैं।
Meena Sundriyal
shandaar story,. Dil Mai aane wale bhav ko bahut badiya tarike se Likha hai
Pawan Pandey
प्रेम जिस्म और उम्र से परे मन की भावना पर आधारित होती है। बेहद संवेदनशील कहानी जो अंत में विरह की व्यथा पाठको को महसूस कर गया।
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