मजबूर मोहब्बत

गोपाल यादव

मजबूर मोहब्बत
(71)
पाठक संख्या − 559
पढ़िए

सारांश

मोहब्बत को मंजिल मुकम्मल हो ये जरूरी नही
शैलेन्द्र पाटिदार
बहुत बढ़िया
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Meenakshi Shrivastava
🙏🙏🙏
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Vinay Anand
क्या कहना, लाजवाब
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रघुराज सिंह
तारीफ के लिए शब्द नही मिल रहे है 👌👍🙏 बहुत खूब लिखा है
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सोनम त्रिवेदी
बहुत उम्दा रचना। आपने जो जो लिखा है ये केवल वही लिख सकता है और केवल उसी के दिल में उतर सकता है जिसने ये दर्द झेल हो या बहुत नज़दीक से किसी को तड़पते देखा हो। बहुत ख़ूब
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Sudhir Kumar Sharma
मार्मिक चित्रण
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किरण सिंह
बहुत खूबसूरत प्रस्तुति...
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M. Mahira
behad hi khubsurt rchna sir ....dil chhu gai
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Samrat maurya
दर्द जब जब हद से गुजर जाते हैं बढ़ जाते हैं एहसास तब तब शब्दों का रूप लेकर आंसुओं की स्याही यादों की कलम लेकर कागज पर उतर आते हैं दर्द जब हद से बढ़ जाते हैं दोस्त ।
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