मजबूरी

डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा

मजबूरी
(38)
पाठक संख्या − 1463
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सारांश

एक गरीब कृषि मजदूर की मजबूरी को दर्शाती लघुकथा...
Anuradha Narde
ek dum Sahi, sachi Rachana.
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Hari Agarwal
behatarin
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Dharm Pal Singh Rawat
एकदम सच कहा।
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ajay
✅✅✅
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aparna
बेहतरीन
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Mukesh Verma
एकदम सही वर्णन कैसा प्रजातंत्र हम आज भी गुलाम है नेताओं के
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अनुपमा झुनझुनवाला
एक गरीब किसान की मजबूरी को इतने कम शब्दों में बहुत ही संजीदगी के साथ दर्शाया है आपने अपनी रचना के माध्यम से 👏👏👏👏
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Bharti K Sharma
समाज का वास्तविक आईना दर्शाती आपकी यह कृति वास्तव में हमें सोचने को मजबूर करती है आपने उस सर्वहारा वर्ग को चुना जिस पर बहुत कम लोग लिखते हैं अनुपम रचना।
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Divyanshu Chaudhary
पुराने समय की व्यथा है
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