मजबूरी

RAJANI GUPTA

मजबूरी
(4)
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सारांश

खिड़की की ग्रिल से बाहर झांकती दो आंखें कहीं उड़ _उड़ जाने को बेचैन मन वह एक अकेली चिड़िया सी जो पिंजरे में कैद है , भोजन और पानी के साथ। आज उसके बच्चे दाना और पानी की तलाश में न जाने किस दिशा में ...
Sid Gupta
👌👌👌अति सुंदर
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