मंदिर

मुंशी प्रेमचंद

मंदिर
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सारांश

मातृ-प्रेम, तुझे धान्य है ! संसार में और जो कुछ है, मिथ्या है, निस्सार है। मातृ-प्रेम ही सत्य है, अक्षय है, अनश्वर है। तीन दिन से सुखिया के मुँह में न अन्न का एक दाना गया था, न पानी की एक बूँद। सामने ...
shambhu singh
मां बेटे का प्यार से बङा कोई रिश्ता नहीं
Pawan Pandey
Radhe Radhe Bahut Sundar kahani
अतीत सिंह
हमेशा की तरह मुंशीजी की रचनाएं दशकों बाद भी हमारे समाज को प्रतिबिंबित करता है। वैसे सुखिया को जियावन को लेकर आसपास के वैध के पास जाना चाहिए था न कि मंदिर जाने की ज़िद में समय नष्ट करना। और एक बात देखिए न नाम में ही कितनी अतिसंयोक्ति है। जिसे एक के बाद एक दुख सहा उसका नाम सुखिया और अल्पाआयु का नाम जियावन!!!!
Sarita Dubey
मन को छू लेने वाली कथा
Mithilesh Kumari
अंधविश्वास की पराकाष्ठा।
Vivek Singh
very emotional , salute to auther, fir general vaale kahte ki reservation kyo Diya ja rahe he
Savita Ojha
मार्मिक कहानी
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