मंगलसूत्र

मुंशी प्रेमचंद

मंगलसूत्र
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सारांश

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद का अंतिम और अपूर्ण उपन्यास...
प्रफुल्ल शिवाय
रचना अधूरी रह गई, लेखक अपनी रचना को पूरा न कर सके।
Neetu Gambhir
bahut achhi rachna thi lekin bhut dukh hua ye jaan ker k isse adhura chhod ker munshi ji chle gye....
अरविन्द सिन्हा
आदर्श एवम् यथार्थ का सुन्दर समन्वय ।
anchal srivastava
बहुत ही शानदार
Kalpana Srivastava
काश प्रेम चंद जी इस कहानी को पूरा कर पाते। वो साहित्य के अद्वितीय रत्न थे
Davinder Kumar
उपन्यास सम्राट प्रेमचंद जी की अप्रीतम रचना है
प्रभु दयाल मंढइया
" मंगलसूत्र " महान साहित्यकार उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की अनुपम रचना है। यदि काल ने उन्हें कुछ और समय दिया होता, तो निसंदेह विश्व साहित्य को एक और कालजयी रचना मिलती तथा साहित्य की अपार श्रीवृद्धि होती ।पाठकों को सदैव यह संताप रहेगा कि उपन्यास सम्राट को यह रचना पूर्ण करने तक का समय तो ईश्वर को देना ही चाहिए था। किंतु ऐसा सम्भव नहीं था और अधूरा काम किसी और के लिए छोङ कर वे गोलोकवासी हो गये। उपन्यास सम्राट का एक पाठक होने के नाते बङी विनम्रतापूर्वक मैंने "मंगलसूत्र " को " मंगलसूत्र का वरदान" शीर्षक से पूरा करने का तुच्छ प्रयास किया है। प्रतिलिपि पर पूर्ण उपन्यास " मंगलसूत्र का वरदान " ( पृष्ठ संख्या 215) उपलब्ध है। विद्वान साहित्यकारों, सुधी पाठकों तथा शोधार्थियों से विनम्र आग्रह है कि वे इस रचना पर अपनी टिप्पणी करें। संदर्भ हेतू पूर्व प्रकाशित अपूर्ण "मंगलसूत्र" के 35 पृष्ठ प्रारम्भ में दिये गये हैं। --प्रभु दयाल मंढइया 'विकल ' prabhumandhaiya5@gmail.com दिनांक 08 -अक्तूबर,,2018
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