मंगलसूत्र = मोबाइल

विनीत शर्मा

मंगलसूत्र = मोबाइल
(365)
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सारांश

सपने देखते एक बाप की कहानी।
Aarti Gupta
bahut hi sunder
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Aparna Garg
यथार्थ से मिलती कहानी, जिसमे कोई अतिशयोक्ति नहीं,
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Chanchlesh Patel
भारतीय ग्रामीण समाज, एक पिता, एक बिटिया, मां और हर परिस्थिति का बेहतरीन चित्रण किया गया है। 5 स्टार में बहुत कम देता हूं किन्तु आपको दिए गए है, इससे कहानी का स्तर स्पष्ट होता है।
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Govind Pandey
बहुत ही शानदार और जानदार रचना । बहुत प्रभावित हुए जी इसीलिए 5 स्टार दे रहे है जी । कहानी में आती परिस्थितियों में मानव मन की स्थिति को बहुत ही बढ़िया ढंग से चित्रित किया है आपने ।
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Kumari Anshu
बहुत ही अच्छी कहानी है।दिल को छू गई
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Megha Srivastava
प्रिय विनीत जी, मेरा सादर भरा नमस्कार स्वीकार करें। आपकी पिछली कहानी मोल भाव, की तरह इस कहानी ने भी मुझे सच में रुला दिया, दिल को, आत्मा को, मन को छूने वाली है आपकी यह कहानी भी , मन को भा गई। इतने अच्छे लेखन में कोई त्रुटि रही ही नहीं सकती जो कहानी किसी को रुला दे।
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Himanshi Saxena
heart touching story
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Dr.Shubhra Varshney
बहुत सुन्दर कहानी, माता पिता अपना सर्वस्व न्योछावर करते हैं बच्चों के पालन पोषण में। बच्चों का भी कर्तव्य है कि उसका मान रख कर अपने माता-पिता का सर हमेशा ऊंचा रखें और आपने यह अपनी कहानी में बखूबी दिखाया है। इसके लिए आपको सादर प्रणाम🙏🙏
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Hemalata Godbole
सुंदर कहानी ।और क्या चाहिए अगर ऐसा हो जाऐ। बडी हिम्मत. लगती है बेटी को पढाकर सही तरह सब कुछ जमाने मे। इसी लिए ये बेटी की शादी. गंगा नहने का पुण्य देती है। और बेटी पराये घर जाकर भी पराई कभी नही होती।शुमंभवतुःः
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Kanchan Jhingran
bahut achchi kahani h apki sabhi kahaniya bahut satik hoti h aj k samay me jo ghat rha h bahut hi sunder tarike se apni rachnao ke dwara prastut karte h
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