भोज का बोझ

डॉ. बीना राघव

भोज का बोझ
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सारांश

रामकली इक्यासी वर्ष की हो चली थी। बुढ़ापे का शरीर शनैः शनैः कमजोर हो ही जाता है। तिस पर सितम अगर बीमारी ढाए तो कृषकाय होना लाजिमी है। सो उसकी हालत हो रही थी। दो -दो पूत थे। वह छोटे बेटे के साथ रह रही थी......
रमेश मेहंदीरत्ता
विडम्बना बहुत है इस संसार में
Ashish Choudhary
संवेदनायें शायद मर चुकी हैं इंसानों में ।
Suresh Madaan
पढ मजा आ गयो
mukesh nagar
अति उत्तम रचना, बेहतरीन शैली, वाह।👌👌
Sutapa Sen
bate bahu sayad amrit pe ker aye hai ye log to Bude hi nahi honge
Ankit Verma
सच्चाई दिखानें वाली सुन्दर कहानी
sachin kothari
maa toh massage he hove
Sudhanshu Singh
🙏👌👌👌👌👌
सुरेश कुमार
आईना है समाज को आपकी और से धन्यवाद आपका
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