भैंसुर

पंकज कुमार

भैंसुर
(138)
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सारांश

ये कहानी दो स्त्री और एक बच्ची की व्यथा कथा है। माँ और दादी की जद्दोजहद अपनी बेटी/पौत्री को अपने ही घर में हो रहे शारीरिक उत्पीडन  ... बलात्कार से बचाने की। एक माँ अपने बच्ची को बचाने को किस स्तर तक त्याग कर सकती है और पुरुष दम्भ को कायम रखने को किस स्तर तक जा सकता है  ...
Sarla Taluja
अच्छी कहानीहै पर अतं अधूरा है
Shakuntala Pandey
कहानी का अन्त सही नहीं है, औरत अपने लिए एक बार शायद सब कुछ सह सकती है लेकिन एक मां नहीं, औरत इतनी कमजोर नहीं है, वो अपने को भी बचा सकती है, और अपने बच्चों को भी।औरत शक्ति का दूसरा नाम है।कहानी अच्छी है आप ने लिखा अच्छा है।
uday kumar
लेखन तो लाजवाब है..पर माफ़ कीजिये अंत समझ नहीं आया।
Santosh Kumari Yadav
kahani samajh nahi aayi yadi samarpan hi karna tha to apni bachchi ko kayo barbad hone diya ese rakchhas ko to maardena chahiye tha
priyanka kain
कहानी का अंत अच्छा नहीं है, नायिका को कमजोर कर दिया गया है, मुझे लगा नायिका उसको मार देगी लेकिन यहाँ तो कुछ और ही हो गया,महिलाओं के लिए प्रेरणादायी नहीं है, महिलाएं ही हमेशा समझौता क्यों करें,कम से कम कहानियों में तो महिलाओं को सशक्त बनाएं, जिससे वे प्रेरित हों,ये एक क्रांतिकारी कहानी हो सकती थी लेकिन दुर्भाग्य से नहीं है, हां कोशिश अच्छी थी,अगली बार नायिका को केंद्र में रख कर एक क्रांतिकारी कहानी लिखें।
Anand Raj Mishra
अंत समझ में नहीं आया, भैंसुर को खत्म कर देना चाहिये था
Monika Chopra
सच्चाई की बिल्कुल सही प्रस्तुति है।आज भी हमारे समाज के ग्रामीण इलाकों में यही होता आ रहा है।सास भुक्त भोगी थी अतः जाती थी कि कुछ किया नहीं जा सकता।परन्तु आपने सास के दिल में आशा की ज्योत जलाई थी फिर अंत में बस पूर्णिमा का बलिदान ही दर्शाया।अंत कुछ और हो सकता था जिससे सास की आशा पूर्ण होती एवम् पाठकों को भी प्रेरित करती ।
Sangeeta Verma
bahut achi kahani , pr kahani ka last clear nahi hua.
Meenal Choradia
कड़वी सच्चाई।मन को व्यथित कर झिंझोड़ देने वाली कहानी या सच्ची घटना? अफसोस होता है कि हम कितने भी आधुनिक हो जायें पर हम पुरूषों के लिए आज भी बस गर्म गोश्त ही हैं जिसे नोच नोच कर खाया जाता है मुझे भी उबकाई आ गई है।अंत में पूर्णिमा ने क्या किया बस यही ना कि ढाई साल की बच्ची को बचाने के लिए खुद को राक्षस के हवाले कर दिया?????अच्छा तो ये होता कि पति और भैंसुर दोनों को ही सबक सिखाती और कबूतरी की तरह स्वछन्द रहती
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