भूलभुलैया (भाग एक)

सोनम त्रिवेदी

भूलभुलैया (भाग एक)
(94)
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सारांश

ड्यूटी से आने के बाद आज नेहा के पापा बहुत खुश थे। चेहरे पर चौड़ी मुस्कान के साथ ही मिठाई का डिब्बा भी था। "क्या बात है नेहा के पापा आज आप बड़े खुश लग रहे है और ये मिठाई भी लाये हैं लग रहा है कोई ...
satyam mishra
आपके लेखन में अपने उत्तर प्रदेश की कुछ भाषा की झलक मिलती है। कहानी बहुत अच्छी लग रही है, सम्भवतः आगे के भागों में रहस्य बढ़ने वाला है।
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Deepika Bhardwaj
बहुत अच्छी रचना है
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Goolo Sai
nice story 👌👌 👌
Abdul Talha Ansari
oswm Story
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Suman Barnwal
osm..😘
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Usha Garg
nice
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ईश्वर सिंह बिष्ट
आपकी भाषा पर अच्छी पकड़ है। कथ्य के साथ शिल्प भी बेहतरीन है। कथा संवाद के माध्यम से आगे बढ़ रही है। कथा में रोचकता बनी रहे चुटीले संवाद हैं । लेकिन लेखनी में वर्तनी का ध्यान रखना होता है। कहानी का शीर्षक भूलभुलैया ही त्रुटि पूर्ण है। इसे संशोधित कीजिएगा ।🌷🌷🌷🙏🙏🙏
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Asmi Srivastava
super interesting starting
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विनीत शर्मा
वाहः बहुत खूब लिखा आपने, कमाल है और अंत मे क्रमशः लिख कर आने वाले भाग के इंतज़ार को मस्तिष्क के भीतर उथल-पुथल मचाने को छोड़ दिया। यह तो ऐसे ही हुआ जैसे कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा...... हा हा हा
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MUNNA
लाजवाब लेख
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