भूलभुलैया (भाग एक)

सोनम त्रिवेदी

भूलभुलैया (भाग एक)
(149)
पाठक संख्या − 8561
पढ़िए

सारांश

ड्यूटी से आने के बाद आज नेहा के पापा बहुत खुश थे। चेहरे पर चौड़ी मुस्कान के साथ ही मिठाई का डिब्बा भी था। "क्या बात है नेहा के पापा आज आप बड़े खुश लग रहे है और ये मिठाई भी लाये हैं लग रहा है कोई ...
विक्रांत कुमार
बहुत बढ़िया शुरुआत
रिप्लाय
Kavi Rohit Kumar
अच्छी लग रही हैं कहानी
रिप्लाय
Yakoob Khan
कहानी की बहुत बढ़िया शुरूआत की है आपने। अंत को रहस्यमयी बना कर छोड़ दिया। निश्चित रूप से आगे भी पढ़ने ही पढ़ेगा। देखना है कि आख़िर नेहा के साथ होता क्या है? 👌👌👍👍
रिप्लाय
Ankit Maharshi
शुरुआत अच्छी है, लेखन परिपक्व है।
रिप्लाय
अंशु शर्मा
आगे का इंतजार बढ़िया लिखा है
रिप्लाय
satyam mishra
आपके लेखन में अपने उत्तर प्रदेश की कुछ भाषा की झलक मिलती है। कहानी बहुत अच्छी लग रही है, सम्भवतः आगे के भागों में रहस्य बढ़ने वाला है।
रिप्लाय
Deepika Bhardwaj
बहुत अच्छी रचना है
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.