भिखारी

अज्ञात

भिखारी
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सारांश

एक भिखारी को बाज़ार में चमड़े का एक बटुआ पड़ा मिला. उसने बटुए को खोलकर देखा. बटुए में सोने की सौ अशर्फियाँ थीं. तभी भिखारी ने एक सौदागर को चिल्लाते हुए सुना – “मेरा चमड़े का बटुआ खो गया है! जो कोई उसे ...
Vijaykant Verma
बहुत सुंदर कहानी
Suneel Kumar
जो ज्यादा होस्यार होते हैं उंक्का यही होता हैं
ललित बदरेल
बेईमानों के लिए अच्छा सबक
Meena Bhatt
कहानी में बचपना पन हे लगता है जैसे बच्चों को सिखाया जा रहा है।
Ajit
Lalchi log ese hi seekhten hain
Meraj Ahmed
क्या बेकार इंसाफ है। कुछ भी।
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