भारत का आरक्षण

विवेक द्विवेदी

भारत का आरक्षण
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विकास कुमार
शायद यह गले में घट बांधने , कमर में झाड़ू बांधने की प्रथा, एक वर्ग को हजारों सालों से सम्पत्ति न रखने की अमानवीय प्रथा न होती तो ये आरक्षण भी न होता, आज भी जातिवाद खत्म हो जाये तो आरक्षण की जरूरत ही न पड़े। व्यथा सवर्णो की भी जायज है पर दलितों पर जाति के नाम पर होने वाले अमानवीय अत्याचार को नजरअंदाज क्यों करें।
Vedprakash Thakur
आपको उन भिखारियों के बारे में भी लिखना चाहिए जिनको बैठने के लिए बेंच भी नसीब नहीं होती और राष्ट्रपति अथवा अन्य महानुभावों के दृष्टि में भी नहीं आ पाते! हमारा इतिहास एक ऐसे वर्ग की गाथा - व्यथा भी है जो युगों से शोषित तथा भेदभाव का शिकार है जिसे आज "आरक्षित - वर्ग" कहा जाता है!!!
हरीश जायसवाल
bade bade desho me chhote chhote log to marte rahate hai
Dinesh Mishra
पता नहीं किसने ये फैलाया है की भाई लोग खालिस देशी हैं बाकी सब होलोग्राम वाले विदेशी। मानवधिकारी अपने वातानुकूलित घेरों से निकल कर ये सब दुर्दशा देख सकेंगे क्या? आरक्षण ने कितने इंसानों के नैसर्गिक अधिकारों का हनन किया है, ऐसे तो मुग़लों और अंग्रेजों ने भी ग़ुलाम बनाया है हिन्दुस्तानियों को फिर उनसे हम द्विपक्षीय समझौते क्यों करते हैं, वहां आरक्षण लेने का प्रयास अंतराष्ट्रीय मंच पर काहे नहीं करते? पूरी दुनिया में मज़ाक बन जायेगा। बैसाखी के सहारे नौकरियां बांटने वाला शायद दुनिया का अकेला देश है हिंदुस्तान। यहाँ के कायरों के कारण जो अपना अधिकार लेने में बल और तेजहीन हैं।
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Dev Sohal
bilkul bakwas story ghatiya
Deepak Dwivedi
Sahi murt diya vicharo ko
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