बड़े दिल वाला मास्टर

Gaurav Kumar 'वशिष्ठ'

बड़े दिल वाला मास्टर
(132)
पाठक संख्या − 6926
पढ़िए

सारांश

घुप्प अंधेरी रात अपनी आधी जिंदगी जी चुकी थी, झींगुर भी बजते-बजते अलसा चुके थे, ठंढी हवा अपनी चुनर फैलाये मदमस्त होकर कुलांचे मारती जिस पेड़ के पास से सायं सायं कर गुजरती तो पेड़ भी अपना समूचा बदन हिला ...
डॉ.संगीता ठक्कर
ऐसे गुरुओं को शत शत नमन । गुरु के पास ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है और इस धन को न तो कोई छीन सकता है, न ही लूट सकता है ।
रिप्लाय
Dhiraj Kumar Shah
मैं एक अध्यापक होने के नाते यह कहूँगा अध्यापक के पास ज्ञान देने के अलावा कुछ भी नही होता है, वो किसी बच्चों में अंतर नही करता है। लेखनी सुंदर है, शब्दों में उतार चढ़ाव है।
रिप्लाय
कोमल मेहता
kahani bohot hi achi hai or kirdar bhi
रिप्लाय
Amit Mishra
हे भगवान !!!! दुनिया मे कितने बड़े बड़े पापी भरे हुए हैं।किसी की मेहनत की कमाई लोग कैसे लूट लेते हैं
रिप्लाय
Somesh Ârmo
👌👌👌👌👌
रिप्लाय
Anjali Shukla
teacher's are great and story also
रिप्लाय
Anand Jha
अगर ऐसे सज्जन व्यक्ति इस दुनिया में है तो मेरा उनको साष्टांग प्रणाम
रिप्लाय
Jaiveer Singh Poonia
very 2 nice
रिप्लाय
Shikha Sharma
अच्छी कहानी । एक शिक्षक को ऐसा ही होना चाहिए ।
रिप्लाय
Beena Awasthi
गौरव जी आपकी कहानी बहुत अच्छी है , लेकिन आज का समय होता तो राधा जी के राकेश को पहचानते ही वो लोग परिवार में किसी को जीवित न छोड़ते।
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.